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हिंदी जातीयता और समाज

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हिंदी जातीयता और समाज


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बंगाल और पंजाब का जहाँ भूगोल बँटा वहीं जिसे हिंदीभाषी क्षेत्र कहा जाता है उसकी भाषाएँ/ बोलियाँ प्रशासकीय स्तर पर व्यावहारिक रूप में स्थगित हो गई। इन भाषाओं/ बोलियों का यह स्थगन, भूगोल के बँटने से कम नुकसानदेह साबित नहीं हुआ। जितना अचानक, तीव्र और प्रभावी यह स्थगन था प्रशासकीय स्तर पर व्यावहारिक रूप में हिंदी की व्यावहारिक स्वीकृति नहीं हो पाने के कारण यह नुकसान और घातक साबित हुआ। इस स्थगन और स्वीकृति का निर्णय राजनीतिक ही अधिक था। स्थगन तो जारी रहा किंतु राजनीतिक कारणों से हिंदी की प्रशासकीय स्तर पर व्यावहारिक स्वीकृति की क्रियाशीलता में शिथिलता और बाद में विरोध एवं उपेक्षा का भाव भी समाविष्ट हो गया। जिन कारणों से हिंदी क्षेत्र की भाषाओं/ बोलियों का यह स्थगन हुआ आजाद भारत में वे कारण कार्य रूप न ले पाये। 


Language Hindi
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